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ब्युरो :(आखिर क्यों न्यूज़) :पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों में जारी टिड्डी दल के हमले  ने अब खेतों के अलावा अब विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए भी खतरा पैदा कर दिया हैआम तौर पर टिड्डी दल निचले स्तरों पर पाए जाते हैं और इसलिए यह विमान के सबसे अहम फेस लैंडिग और टेकऑफ में खतरा पैदा कर

डीजीसीए ने कहा, ‘हालांकि एक एक टिड्डी आकार में छोटी होती है लेकिन विंडशील्ड पर बड़ी संख्या में टिड्डियों का हमला
पायलट फॉरवर्ड विजन को प्रभावित करने के लिए काफी है. यह फ्लाइन के लैंडिंग, टैक्सी और टेक ऑफ चरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है. कई बार वाइपर के इस्तेमाल से धब्बा और भी फैल सकता है, पायलट को विंड शील्ड से टिड्डे को हटाने के लिए वाइपर का उपयोग करने से पहले इस पहलू पर विचार करना चाहिए,”

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टिड्डियों के बड़े झुंड एक जमीन के बड़े हिस्से में देखने में बाधा डाल सकते हैं. एजेंसी ने कहा, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स से पायलटों को यह बताने के लिए कहा जाए कि क्या टिड्डियों के झुंडों को देखा गया है?”जहां तक संभव हो, यह सख्त निर्देश दिए जाते है कि टिड्डियों के किसी तरह के झुंड के दिखने पर उड़ान टाल देनी चाहिए. एकमात्र अनुकूल पहलू यह है कि टिड्डे रात में नहीं उड़ते हैं, इस प्रकार यह देखने और बचने का बेहतर अवसर प्रदान करता है,टिडि्डयों का जीवन सामान्यतया 3 से 6 माह का होता है. नमी वाले इलाकों में ये एक बार में 20 से 200 तक अंडे देती हैं, जो 10 से 20 दिन में फूटते हैं. शिशु टिड्डी का पेड़-पौधे खाती है, 5-6 हफ्ते में बड़ी हो जाती है. इन्हें मारने का सबसे अच्छा उपाय अंडों के फूटते ही उन पर रसायन का छिड़काव है. टिड्डी अपने वजन से कहीं अधिक भोजन एक दिन में खाती है. ये एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है.

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अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से 1 लाख 25 हजार एकड़ खेतों को नुकसान पहुंचा है. 4 करोड़ टिड्डियों का दल 35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है.

 

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By aakhirkyon

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