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बठिंडा, 7 मार्च ,(आख़िर क्यों न्यूज़)::
सी.सी.एम इंस्टीच्ट्यूट आफ इलेक्ट्रो होमेयोपैथी और ई एच हॉस्पिटल की डायरेक्टर डाक्टर वरिंदर कौर (एम.डी.ई.एच) पिछले कई साल से बठिंडा पंजाब के चंदसर नगर में चिकित्सा जगत की पांचवी पैथी इलेक्ट्रो होम्योपैथी (ई.एच) के प्रसार-प्रचार के लिए निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
यहां पर इलेक्ट्रो होम्योपैथी की बारकियां सीखने वालों की तादात बहुयात है। हर शनिवार को तीन-चार घंटे की लगने वाली कलास में शहर के गली-मुहल्लों में प्रेक्टिस कर रहे नामचीन डाक्टर भी दिखाई पड़ते हैं। इलेक्ट्रो होम्योपैथी की डिग्री व डिप्लोमा धारक यहां से ज्ञान लेने आते हैं। क्रेज इतना है कि हरियाणा, राजस्थान से भी इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़े प्रेक्टीनिशियर उमड़ते हैं। बाकायदा इन बी.ई.एम.एस, डी.ई.एच.एम क्वालीफाईड को प्रेक्टिकल और विभिन्न पेशेंटों की केस हिस्ट्री के माध्यम से रोगों के निदान के लिए समझाया जाता है। यही नहीं अल्केमी लैबोटरी में प्लांट से दवाई बनाने की विधि, स्परेजिक एसेंस की प्रणाली को भी लाईव दिखाया जाता है। ईएच के जन्मदाता काउंट सीजर मैटी के नक्शे कदम पर चलने की कवायद में जुटी सी.सी मैटी इंस्टीच्ट्यूट आफ इलेक्ट्रो होमेयोपैथी, चंदसर नगर में डाक्टर वरिंदर कौर एम.डी.ई.एच अपनी लगन में लगी हैं। वह गरीबों को निशुल्क दवाइया देती हैं। डाक्टर वरिंदर कौर एम.डी.ई.एच कहती है कि देश में साल 1920 के आसपास इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की संभवतय: पहली क्लीनिक खुली थी। आज 100 साल हो गए लेकिन उक्त पैथी अपनी मान्यता को लेकर संर्घष कर रही है। वह कहती हैं कि इस बाबत केन्द्र सरकार की ओर से बनाई गई आई.डी.सी कमेटी से कई बैठकें हो गई है। अब जरूरत है कि सभी डॉक्टर्स, संगठन, बोर्ड, काउंसिल आदि एक मंच पर आ जाएं। उक्त ई.एच पैथी अन्य के मुकाबले सस्ती है। इसका कोई साईड इफेक्ट भी नहीं। डाक्टर वरिंदर कौर कहती हैं कि इस पैथी की खोज 1865 में इटली के डाक्टर काउंट सीजर मैटी की ओर से की गई थी। इसमें में 114 के पौधों स्पाक्यरिक एसेंस से मरीजोंका इलाज किया जाता है। इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान वैकल्पिक प्रणाली की एक व्यापक शाखा है। इस चिकित्सा प्रणाली में मूल रूप से औषधीय पौधों क रस को आसवन प्रक्रिया की सहायता से तैयार किया जाताहै। वर्तमान में 114 प्रकार के पौधों के स्पाक्यरिक एसेंस से 38 प्रकार की मूल औषधियां तैयार की जा रही हैं। जिनका उपयोग एकल व सम्मलित रूप से 60 से अधिक औषधियों के रूप में किया जा रहा है।

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By aakhirkyon

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