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पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू ने इस पद से अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। शुक्रवार को चंडीगढ़ सेक्टर 27 स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धू ने ये घोषणा की। हालांकि सिद्धू ने ये शर्त भी रख दी है कि नए अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति के बाद ही वे पदभार ग्रहण करेंगे। उन्होंने साफ किया उनका इस्तीफा व्यक्तिगत अहंकार का मामला नहीं था, बल्कि हर पंजाबी का हित था।19 जुलाई को पंजाब कांग्रेस प्रधान बनाए गए सिद्धू ने नए सीएम बने चरणजीत चन्नी के मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा होते ही इस्तीफा दे दिया था।

सिद्धू के इस्तीफे का एक बड़ा कारण एपीएस दयोल की महाधिवक्ता पद पर नियुक्ति था। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के द्वारा एजी के पद पर दयोल की नियुक्ति किए जाने के बाद से ही सिद्धू नाराज चल रहे थे। एक नवंबर को ही एपीएस दयोल ने पंजाब के एडवोकेट जनरल के पद से इस्तीफा दिया था।

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सिद्धू ने इसके पीछे दलील दी थी कि बेअदबी मामले के खिलाफ दयोल ने ही कोर्ट में पैरवी की थी। इसके अलावा उन्होंने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी का केस भी लड़ा था। इन दोनों मामलों को लेकर पहले भी नवजोत सिंह सिद्धू पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार पर हमले बोलते रहे हैं।

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दयोल की एजी पद पर नियुक्ति का विपक्षी दलों ने भी जोरदार विरोध किया था। दरअसल, एडवोकेट दयोल पंजाब सरकार के खिलाफ कई महत्वपूर्ण केसों की पैरवी कर रहे हैं, जिनमें बेअदबी मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी व परमराज उमरानंगल का केस भी शामिल है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी दयोल सुमेध सैनी के वकील हैं और उन्होंने ही हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की आपत्तियों का खारिज कराते हुए सैनी के खिलाफ जारी कार्रवाई पर 2022 के चुनाव तक रोक लगवाई है।

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By aakhirkyon

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