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जालंधर,7 सितंबर, (आख़िर क्यों न्यूज़, वरिंदर शर्मा): बिल्डिंग ब्रांच के एक बड़े अफसर पर गाज गिरने के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट रविंदरपाल चड्डा बोले जालंधर के किसी अफसर ने उन पर मेहरबानी करके राजेंद्र शर्मा को फिर से एटीपी बना दिया।

नगर निगम के बिल्डिंग ब्रांच के अफसर राजेंद्र शर्मा को एटीपी हेडक्वार्टर बनाए जाने पर कोई एतराज नहीं। लेकिन कम से कम यह बताया जाए उनको एटीपी किस हुकम के आधार पर बनाया गया क्या सरकार द्वारा कोई चिट्ठी निकाली गई, जालंधर के किसी अफसर ने उन पर मेहरबानी करके उन्हें इंस्पेक्टर से एटीपी बना दिया।

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क्योंकि कुछ समय पहले ही बिल्डिंग ब्रांच के अफसर राजेंद्र शर्मा को डिमोट किया गया था। किसके हुकमों के आधार पर राजेंद्र शर्मा को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई और एटीपी बनाया गया। उन्होंने बताया कि आरटीआई में भी उस हुकम की कॉपी अभी तक नहीं दी जा रही जिस हुक्म के आधार पर उनको एटीपी बनाया गया यह सरकार को या नगर निगम कमिश्नर को अब तक जगजाहिर कर देनी चाहिए थी।

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आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र पाल चड्ढा ने बताया गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले भी उनको इसको एटीपी बनाया गया था । लगभग 2018 की बात है तब परमपाल और एमटीपी लखबीर ने गलत रिपोर्ट के आधार पर एटीपी का दर्जा दिला दिया था । तब राजेंद्र शर्मा जालंधर तैनात थे और कमिश्नर दीपर्व लाकड़ा थे ।
काफी दिन बिना काम के बिठाया था निगम में
राजिंदर शर्मा को
उन दिनों पंजाब के मंत्री और प्रमुख सेकेटरी के हुकम के आधार पर राजिंदर शर्मा डिमोट किया गया था , काफी समय तक एक कमरे में राजेंद्र शर्मा बैठे रहते थे इन्हें कोई काम भी नहीं दिया जाता था । एक डिमोट हुए एटीपी को कैसे फिर से एटीपी का चार्ज मिल जाता है यह बात आज तक समझ नहीं आई लेकिन निगम के अफसरों की मिलीभगत से यह खेल तीन – चार साल से चल रहा था । एटीपी से इंस्पेक्टर बनाए जाने को लेकर राजेंद्र शर्मा ने सरकार पर केस कर रिट पिटिशन भी डाली थी । लेकिन कई कारणों की वजह राजेंद्र शर्मा नहीं वह पार्टीशन वापस ले ली थी ।

उसके बाद दोबारा 2022 मे फिर से हाईकोर्ट में हालांकि इंस्पेक्टर बनाए जाने के खिलाफ रविंदर शर्मा द्वारा फिर से पिटीशन डाली गई ।

आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र पाल चड्ढा बताया कि उन्होंने लोकपाल में भी इसका केस लगाया हुआ है । फिर पंजाब गवर्नमेंट ने एक चिट्ठी निकाली है , जिसमें यह पूछा गया कि किस हुकुम के आधार पर इस्पेक्टर को एटीपी बनाया गया उसका जवाब दिया जाए । राजेंद्र शर्मा को एटीपी के तौर पर दिए गए सेक्टर का चार्ज भी वापस ले लिया गया है । पुराने जांच के एक मामले में राजेंद्र शर्मा के बयान के आधार पर एक पद से नीचे रैंक पर डिमोट करने के पुराने आदेशों को 6 अगस्त 2021 की रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया गया था । अब हुई दोबारा जांच में कहा गया है कि अगस्त 2021 में जारी किए गए आदेश गलत तथ्यों के आधार पर लिया गया फैसला था । नगर निगम कमिश्नर दीपशिखा शर्मा ने 31 मई को नए आदेश जारी किए थे और 2017 के फैसले के अनुसार राजेंद्र शर्मा को बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर काम करने के आदेश दिए थे।
जब नगर निगम कमिश्नर दीपशिखा ने एटीपी राजेंद्र शर्मा को इंस्पेक्टर के पद पर तैनात कर ही दिया था तो ऐसी कौन सी आफत आ गई कि फिर से एटीपी का चार्ज दे दिया गया या कोई प्रिंसिपल सेक्टरी द्वारा ऑर्डर किया गया है तो उसकी कॉपी अभी तक मीडिया को जगजाहिर क्यों नहीं की या नगर निगम के किसी अफसर द्वारा एटीपी बनाया भी गया है, उसकी पीछे क्या मंशा रही, क्या वजह रही उसकी कोई कॉपी अभी तक जग जाहिर नहीं की। रविंद्र पाल चड्डा ने यह भी कहां है कि एटीपी बनाने के पीछे उसके हुकुम की कापी जग जाहिर की जाए ।

आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र पाल चड्ढा ने कहा कि अगर उसको एटीपी के पद से वापस नहीं लिया तो फिर से प्रिंसिपल सेक्टरी को शिकायत की जाएगी और कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

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By aakhirkyon

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